नई दिल्ली: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत का कड़ा संदेश – आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, जयशंकर ने ठुकराया तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का दावा

New Delhi: India's strong message after 'Operation Sindoor' - zero tolerance on terrorism, Jaishankar rejected the claim of third party mediation

नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर एक बड़ा प्रहार साबित हुआ है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया, लेकिन 10 मई को अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद सीजफायर की घोषणा कर दी गई।

जयशंकर ने दिया स्पष्ट जवाब: भारत लेता है अपने फैसले स्वयं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जो इस समय यूरोप दौरे पर हैं, ने डच सरकारी चैनल NOS को दिए इंटरव्यू में पहली बार इस घटनाक्रम पर खुलकर बात की। उन्होंने दो टूक कहा:

“भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है। हम अपने हितों और सुरक्षा को देखते हुए खुद फैसले लेते हैं। किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की भारत को आवश्यकता नहीं है।”

ट्रंप के दावे पर भारत का इंकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को लेकर दावा किया था कि उन्होंने तनाव कम करवाने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। जयशंकर ने दोहराया:

“भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी मुद्दे का समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत से ही होगा। बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।”

ऑपरेशन सिंदूर: भारत का निर्णायक रुख
जयशंकर ने कहा कि 7 मई को पाकिस्तान और पीओके में चलाए गए ऑपरेशन के जरिए भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि:

“आतंकवादियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कहीं भी छिपे हों। पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की जो हत्या की गई, वह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर ऐसा हमला दोबारा हुआ, तो जवाब और भी कठोर होगा।”

पाकिस्तान की धार्मिक सोच और उकसावे की राजनीति
जयशंकर ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर सीधा हमला करते हुए कहा:

“वहां के निर्णय धार्मिक कट्टरता से प्रेरित होते हैं। पाकिस्तानी सेना और उसके नेतृत्व ने ही इस तरह के हमलों को उकसाया है।”

भारत का कड़ा संदेश: आतंक पर कोई समझौता नहीं
भारत का रुख अब पूरी तरह स्पष्ट है – आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और हर हमले का जवाब उसी तीव्रता से दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को भी यह संदेश दिया गया है कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा, और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि यह भारत की बदलती रणनीति और नए आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुका है।

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